बुधवार, 22 दिसंबर 2010

दस्तूर

तेरी इन नर्गीसी आँखों का, मै दस्तूर देखूंगा ,
कितना मरती है मेरे पे अ मेरी हूर  देखूंगा |
जब भू तू खड़ी होगी सखियों के झुरमुट में ,
तुम्हारी नजरों का जलवा, खड़ा मै दूर देखूंगा |
ये मै जानता हूँ कि अनगिनत हीरे खड़े होंगे ,
मगर मै तो उनमे चमकता कोहेनूर देखूंगा |
मुझको देखने वाले , मुझे दीवाना समझेंगे ,
तुमको देखूंगा  मै,मगर बा-दस्तूर देखूंगा |
अगर फिर भी न मिली मेरी नजरों से नज़र तेरी,
तो फिर कैसे होता है ये दिल मेरा चकनाचूर देखूंगा|

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