सब कुछ लुट गया ,सब कुछ खो गया, कुछ भी रहा न पास,
दिल में कसक सी बनकर रह गयी एक अधूरी आस |
ऊपर वाले ने तो दी थी खूबियाँ मुझे अनेक ,
एक भी काम ना आई है, ये किस्मत कि बात |
मेरी गजलें, नज्मे पढकर, करते सब तारीफ ,
लेकिन मेरे पास क्या बचा, सिर्फ एक अहसास |
चुन-चुन कर लिखता हूँ लफ्ज़ मै, ज्यों माला में मोती ,
ये जुमला यारों का मुझको देता है उल्हास | शुक्रगुजार हूँ यारों का मै जो हिम्मत देते हैं ,
करके हौसला-आफजाई, भरते मुझमे विश्वास |
उनके सहारे चला जा रहा हूँ मै कदम बड़ाते ,
कभी ना कभी तो आएगी ही मंजिल मेरे पास |
कभी समय आएगा मेरा, कभी तो दिन बदलेंगे ,
कभी तो पूरी होगी मेरी एक अधूरी आस |
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