शनिवार, 18 दिसंबर 2010

हिम्मत

सिलसला यादों का , आया है जो टल जाएगा ,
वक्त के साथ दूर, कहीं दूर निकल जाएगा | 
आज डूबा है जो सूरज , तू इसकी फ़िक्र न कर ,
फिर से कल दूसरा सूरज भी निकल आएगा |
क्या हुआ जो एक साथी ने साथ छोड़ दिया ,
उससे बेहतर भी कोई दूसरा मिल जाएगा |
दिल में उम्मीद रख अम्बर के तारे छूने की ,
वरना दुनियां की भीड़ में न सम्भल पायेगा |
ये जो दुनियां है बस उम्मीद पर ही जिंदा है ,
वरना इंसान तो घुट-घुट कर ही मर जाएगा |

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