मुम्बई की सर जमीं, सदाबहार देव आनंद |
एक महकता हुआ , गुले-गुलज़ार देव आनंद |
एक्टर है, डायरेक्टर है produosr है बा-कमाल |
हर फन में माहिर है हु-बू-हु , फनकार देव आनंद |
रखा अलग है जिसने , अंदाज़ हमेशा ही,
अपनी ही धुन में मस्त कलाकार देव आनंद |
बीती हुई वो बाते , गुज़रे हुए जमाने ,
अब भी है तरो-ताज़ा , इस शख्स के फसाने |
सुनते है निकलता था जब भी कहीं को जाने ,
थी लडकियाँ बुलाती , फल वालो के बहाने |
मरती थी जिस पर वो कहकशां की हुरें,
बेताब सी रहती थी , इसकी झलक को पाने |
लम्बा, जवान, खुसमिज़ाज़ सा ,
चलने का भी जिसका अपना अंदाज़ था |
कुछ करने की धुन मन में हमेशा लिए हुए ,
करते भी रहना काम , लगाना भी कह-कहे |
फिल्मे भी जो बनाई , सभी बे-मिसाल है ,
नुस्खे भी बनाने के , इसके बा-कमल है |
कितनी ही हिरोइनों को , इस शख्स ने उभारा ,
जो भटकती फिरती थी , इसने दिया सहारा |
कितने ही नये नाम , फिल्म नगरी में चमकाए,
हर दौर में इस शख्स ने अपने जौहर दिखाए |
भगवान् करे तंदरुस्त हो और चमके इनका नाम ,
पहुंचे नरेंद्र नाज़ का , इस हस्ती को सलाम |
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