मंगलवार, 8 नवंबर 2011

करवट

खड़ा तैयार होगा कल ये तेरे साथ चलने को ,
एक करवट काफी है जहां का रूख बदलने को |

सूरज निकलता है फिर उसमे तपिश आती है ,
फिर दो-पहर लग जाते है उसकी शाम ढलने को |

जरा देखो तो कितना सब्र करता है बांस का पौधा ,
सुना है सौ बरस लगते है उसमे फूल खिलने को |

परवाना भले ही जनता है यह की मौत है आगे ,
बरोबर तडफता है पर उसी शमा पे जलने को |

तेरे होठो की जुम्बिश ने किया है नाज़ पर जादू ,
खड़ा तैयार है वो हर मुशीबत को कुचलने को |

बुधवार, 22 दिसंबर 2010

दस्तूर

तेरी इन नर्गीसी आँखों का, मै दस्तूर देखूंगा ,
कितना मरती है मेरे पे अ मेरी हूर  देखूंगा |
जब भू तू खड़ी होगी सखियों के झुरमुट में ,
तुम्हारी नजरों का जलवा, खड़ा मै दूर देखूंगा |
ये मै जानता हूँ कि अनगिनत हीरे खड़े होंगे ,
मगर मै तो उनमे चमकता कोहेनूर देखूंगा |
मुझको देखने वाले , मुझे दीवाना समझेंगे ,
तुमको देखूंगा  मै,मगर बा-दस्तूर देखूंगा |
अगर फिर भी न मिली मेरी नजरों से नज़र तेरी,
तो फिर कैसे होता है ये दिल मेरा चकनाचूर देखूंगा|

सोमवार, 20 दिसंबर 2010

अधूरी आस

सब कुछ लुट गया ,सब कुछ खो गया, कुछ भी रहा न पास,
दिल में कसक सी बनकर रह गयी एक अधूरी आस |
ऊपर वाले ने तो दी थी  खूबियाँ मुझे अनेक ,
एक भी काम ना आई है, ये किस्मत कि बात |
मेरी गजलें, नज्मे पढकर,  करते सब तारीफ ,
लेकिन मेरे पास क्या बचा, सिर्फ एक अहसास |
चुन-चुन कर लिखता हूँ लफ्ज़ मै, ज्यों माला में मोती ,
ये जुमला यारों का मुझको देता है उल्हास | शुक्रगुजार हूँ यारों का मै जो हिम्मत देते हैं ,
करके हौसला-आफजाई, भरते मुझमे विश्वास |
उनके सहारे चला जा रहा हूँ मै कदम बड़ाते ,
कभी ना कभी तो आएगी ही मंजिल मेरे पास |
कभी समय आएगा मेरा, कभी तो दिन बदलेंगे ,
कभी तो पूरी होगी मेरी एक अधूरी आस |  

in respect of the audiance

कितना दिलकश कितना रंगीन है आज मौसम ,
कैसे सज-धज के आज कितने लोग आये है |
सबके कपड़ो में चमकदार झील-मिलाह्ट है,
लग रहा है कि जैसे जुगनुओं के साये है |
या इन्हें देखकर कुछ इस तरह लगता है ,
कि ज्यों आसमान से सितारे उतर आये हैं |
सुन रहे है वो बड़ी गौर से गजले मेरी ,
जैसे फ़िक्र अपने घर पे छोड़ आये है |
अपनी ठुड्डी को अंगूठे का सहारा देकर ,
मेरे रुखसार पे वो टकटकी लगाए हैं |
कुछ बड़े गौर से देखें मेरा अंदाज़े-बयाँ ,
कुछ मेरे साथ मेरे सुर में सुर मिलाये हैं |
ऐसे लोगों का तहदिल से शुक्रगुज़ार है नाज़ ,
जिन्होंने साथ बैठकर ये पल बिताएं हैं |

वक्त

वैसे तो हर इंसान की , अपनी ही डगर है,
ये वक्त जानता है कि वो जाता किधर है |
दिल में हजारो ख्वाहिशें, और लाखो उम्मीदें ,
ये कौन जानता है कि नतीजा सिफर है |
अपना फर्ज़ निभाना है हर इक फूल को ,
वो क्या जाने कि पैर है किसी के या सर है |
दिल के जलों के लिए बस दो ही हैं ठिकाने ,
या तो वो दर खुदा का है या यार का घर है |
मैंने तुम्हे समझाया है अक्सर ये कई बार ,
दिल की लगी का होता बहूत बुरा हश्र है |
किसने कहा था तुमको कि आकर मिला करो ,
ये इश्क का असर नही तो किसका असर है |

आजमाइस

हमको जरा आजमाकर तो देखो ,
हमसे कभी दिल लगाकर तो देखो |
वैसे तो देखी है तुमने ये दुनियां ,
दुनियां  से हमको हटकर तो देखो |
माना की सब कुछ है ,लाजो-शर्म पर ,
लाज-ओ-शर्म को , भुलाकर तो देखो |
शर्माने से तो यूँ कुछ न बनेगा ,
थोडा सा साहस , जुटा कर तो देखो |
जरा सा तक्क्लुफ़ ही करना पड़ेगा ,
कि चेहरे से घुंघट हटा कर तो देखो |      

शनिवार, 18 दिसंबर 2010

अलविदा-2010

अलविदा ए जाने वाले साल तुमको अलविदा ,
शुक्रिया ए जाने वाले साल तेरा शुक्रिया |
तुमने जो अब तक  निभाया हम सभी का साथ है,
वो हमारे वास्ते एक कीमती सौगात है |
रख लिया चुप-चाप हमने, हमको जो तुमने दिया | शुक्रिया ए जाने वाले साल तेरा शुक्रिया|
ढेर सारे गम दिए या बे-तहासा दी खुशी,
वो हमारे वास्ते थी खुश-नुमाँ  इक ज़िन्दगी |
हमने उस तोहफे को सर-आँखों पे अपने रख लिया ,शुक्रिया ए जाने वाले साल तेरा शुक्रिया |
शुक्रिया तेरा की हमने तुमसे प्यार जो ,
फिर दोबारा न मिलेगा किसी हालत यार वो,
वो हमे जन्न्नत के दरवाज़े तलक पहुंचाएगा ,शुक्रिया ए जाने वाले साल तेरा शुक्रिया |
जो दिया है हमको तुमने वो बहूत अच्छा दिया ,
जो किया तुमने हमारे लिए वो अच्छा किया ,
करते है मिलकर सभी हम  लाख तेरा शुक्रिया , शुक्रिया ए जाने वाले साल तेरा शुक्रिया |